वैश्विक व्यापार के युग में टैरिफ (Tariff) अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। विशेष रूप से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। यह लेख टैरिफ की अवधारणा, ट्रंप की व्यापार नीति और इसके वैश्विक प्रभाव को विस्तार से समझाता है।
टैरिफ एक सरकारी कर है जो किसी देश में आयात या निर्यात होने वाले सामान पर लगाया जाता है। यह व्यापार नीति का प्रमुख साधन है जिसका उपयोग देश अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को संरक्षित करने के लिए करते हैं।
उत्पाद मूल्य का प्रतिशत के रूप में
मात्रा या वजन के आधार पर
दोनों का मिश्रित रूप
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल (2017-2021) में "America First" नीति के तहत व्यापक टैरिफ लगाए। उनका मानना था कि अमेरिका दशकों से अनुचित व्यापार समझौतों का शिकार रहा है, जिससे अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र और रोजगार प्रभावित हुए हैं।
अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा व्यापार संघर्ष बन गया। 2018 में शुरू हुआ यह विवाद दो महाशक्तियों के बीच आर्थिक प्रभुत्व की लड़ाई थी।
पहला चरण (2018): अमेरिका ने चीनी सामान पर $34 बिलियन का टैरिफ लगाया, चीन ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की।
दूसरा चरण (2019): टैरिफ का दायरा $370 बिलियन तक विस्तारित हुआ, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और उपभोक्ता सामान शामिल थे।
फेज-वन समझौता (2020): दोनों देशों ने आंशिक समझौते पर हस्ताक्षर किए, लेकिन अधिकांश टैरिफ बने रहे।
चीनी सामान पर टैरिफ
औसत टैरिफ दर
अमेरिकी सामान पर चीनी टैरिफ
ट्रंप की टैरिफ नीति का भारत पर मिश्रित प्रभाव रहा। जहां कुछ क्षेत्रों में चुनौतियां आईं, वहीं नए अवसर भी खुले।
2019-2020 में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार लगभग $88 बिलियन रहा। भारत का निर्यात $53 बिलियन और आयात $35 बिलियन था, जिससे भारत के पक्ष में $18 बिलियन का व्यापार अधिशेष रहा।
ट्रंप के टैरिफ ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को मौलिक रूप से बदल दिया। इसके दूरगामी परिणाम आज भी महसूस किए जा रहे हैं।
SSC, UPSC, Banking, Railway, RPSC जैसी सरकारी परीक्षाओं में अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और व्यापार से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। टैरिफ की अवधारणा, ट्रेड वॉर, WTO, और वैश्विक व्यापार समझौते महत्वपूर्ण विषय हैं।
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टैरिफ एक सरकारी कर है जो आयात या निर्यात किए गए सामान पर लगाया जाता है। यह घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने और सरकारी राजस्व बढ़ाने के लिए लगाया जाता है। सरल शब्दों में, जब कोई सामान दूसरे देश से आता है, तो उस पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है जिसे टैरिफ कहते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने "America First" नीति के तहत टैरिफ लगाया। उनके मुख्य उद्देश्य थे: (1) अमेरिकी विनिर्माण उद्योग और नौकरियों को बचाना, (2) चीन और अन्य देशों के साथ व्यापार घाटा कम करना, (3) अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकना, और (4) अमेरिकी कंपनियों को घर वापस लाना। विशेष रूप से चीन पर बौद्धिक संपदा चोरी और अनुचित सब्सिडी के आरोप थे।
हां, भारत पर मिश्रित प्रभाव पड़ा। नकारात्मक पक्ष: स्टील और एल्यूमिनियम निर्यात पर 25-30% टैरिफ लगा, GSP (सामान्यीकृत वरीयता प्रणाली) सुविधा वापस ली गई जिससे $5.6 बिलियन का व्यापार प्रभावित हुआ। सकारात्मक पक्ष: चीन से विनिर्माण स्थानांतरण का लाभ मिला, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स निर्यात में नए अवसर खुले।
टैरिफ का सीधा असर उपभोक्ता कीमतों पर पड़ता है। जब आयातित सामान पर टैरिफ लगता है, तो वह सामान महंगा हो जाता है। यह लागत अंततः उपभोक्ता को चुकानी पड़ती है। उदाहरण: अमेरिका में चीनी सामान पर टैरिफ के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और घरेलू सामान 5-10% तक महंगे हो गए। हालांकि, घरेलू उद्योग मजबूत होने से स्थानीय रोजगार बढ़ सकता है।
हां, बड़े पैमाने पर टैरिफ से वैश्विक अर्थव्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित होती है। ट्रंप टैरिफ के परिणाम: (1) वैश्विक व्यापार वृद्धि 2.9% से घटकर 1.2% रह गई, (2) सप्लाई चेन में व्यवधान आया, (3) निवेश में अनिश्चितता बढ़ी, (4) जवाबी टैरिफ से व्यापार युद्ध शुरू हुआ, (5) IMF के अनुसार वैश्विक GDP में 0.5% की कमी आई। यह 1930 की महामंदी के बाद का सबसे बड़ा व्यापार संघर्ष था।
नहीं, टैरिफ के कुछ लाभ भी हैं। सकारात्मक पहलू: (1) नवजात उद्योगों (infant industries) को विकसित होने का मौका, (2) रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता, (3) स्थानीय रोजगार सृजन, (4) सरकारी राजस्व में वृद्धि, (5) डंपिंग (अनुचित रूप से सस्ते सामान) से सुरक्षा। हालांकि, अत्यधिक या गलत तरीके से लगाया गया टैरिफ व्यापार युद्ध, महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है।
विश्व व्यापार संगठन (WTO) अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों को नियंत्रित करता है। WTO के नियम: (1) सदस्य देश मनमाने तरीके से टैरिफ नहीं बढ़ा सकते, (2) राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर टैरिफ की अनुमति है, (3) डंपिंग विरोधी शुल्क लगाया जा सकता है, (4) विवादों के लिए निपटान तंत्र है। ट्रंप टैरिफ ने WTO प्रणाली को चुनौती दी और बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
2026 में कई टैरिफ अभी भी लागू हैं। हालांकि बाइडन प्रशासन ने कुछ टैरिफ हटाए, लेकिन चीन पर अधिकांश टैरिफ बने हुए हैं। वर्तमान स्थिति: (1) तकनीकी उत्पादों पर 25% टैरिफ जारी, (2) नए आपूर्ति श्रृंखला समझौते विकसित हो रहे हैं, (3) भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, (4) वैश्विक व्यापार पुनर्संतुलन जारी है।
टैरिफ वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण लेकिन जटिल पहलू है। डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति ने दुनिया को यह सिखाया कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक मुद्दा भी है।
भारत के लिए यह समय अवसर और चुनौती दोनों लेकर आया है। "China Plus One" रणनीति, आत्मनिर्भर भारत अभियान और निर्यात प्रोत्साहन के माध्यम से भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय संबंध, अर्थव्यवस्था और करेंट अफेयर्स में टैरिफ, व्यापार युद्ध और वैश्विक व्यापार से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
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